⚔️ 1857 की क्रांति: राजस्थान
स्वतंत्रता संग्राम का गौरवशाली इतिहास
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- संधियाँ: 1818 ई. में अंग्रेजी कम्पनी के साथ संधियाँ कर राजाओं ने बाहरी सुरक्षा तो प्राप्त की, लेकिन आंतरिक स्वायत्तता खो दी।
- तात्कालिक कारण: एनफील्ड राइफल के कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी का प्रयोग।
- प्रतीक चिन्ह: कमल का फूल और रोटी (चपाती)।
- नेतृत्व: बहादुर शाह जफर-द्वितीय।
🏛️ राजपूताना रेजीडेंसी (प्रशासनिक ढांचा)
- स्थापना: 1832 ई. (मुख्यालय: अजमेर)।
- ग्रीष्मकालीन कार्यालय: आबू (1845 ई. से)।
- क्रांति के समय A.G.G.: जॉर्ज पैट्रिक लॉरेन्स।
- ब्रिटेन PM: पार्मस्टन | गवर्नर जनरल: लॉर्ड कैनिंग।
📍 रियासतें, शासक एवं पॉलिटिकल एजेंट
| रियासत | शासक | पॉलिटिकल एजेंट (P.A.) |
|---|---|---|
| कोटा | रामसिंह-द्वितीय | मेजर बर्टन |
| जयपुर | रामसिंह-द्वितीय | मेजर ईडन |
| मारवाड़ (जोधपुर) | तख्त सिंह | जी.एच. मेकमोसन |
| मेवाड़ (उदयपुर) | स्वरूप सिंह | कैप्टन शावर्स |
| भरतपुर | जसवंत सिंह | मॉरीसन |
| सिरोही | शिवसिंह | जे.डी. हॉल |
| धौलपुर | भगवन्त सिंह | निक्सन |
💂 राजस्थान की 6 सैनिक छावनियाँ
- नसीराबाद (अजमेर): 15वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री।
- नीमच (M.P.): प्रथम बंगाल कैवेलरी।
- देवली (टोंक): कोटा कन्टिनजेन्ट।
- एरिनपुरा (पाली): जोधपुर लीजन।
- ब्यावर (अजमेर): मेर रेजीमेंट (विद्रोह में भाग नहीं लिया)।
- खेरवाड़ा (उदयपुर): मेवाड़ भील कोर (विद्रोह में भाग नहीं लिया)।
🔥 प्रमुख विद्रोह केंद्र
1. नसीराबाद विद्रोह (28 मई 1857) – प्रथम विद्रोह
राजस्थान में क्रांति की शुरुआत यहीं से हुई। 15वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री ने मेजर स्पोटिस वुड और न्यूबरी की हत्या कर दिल्ली की ओर प्रस्थान किया।
2. नीमच विद्रोह (3 जून 1857)
मोहम्मद अली बेग ने वफादारी की शपथ लेने से इनकार कर दिया। क्रांतिकारियों ने शाहपुरा और टोंक होते हुए दिल्ली कूच किया।
3. एरिनपुरा एवं आउवा विद्रोह (21 अगस्त 1857)
- नारा: “चलो दिल्ली, मारो फिरंगी”।
- कुशालसिंह चंपावत: आउवा के ठाकुर जिन्होंने विद्रोह का नेतृत्व किया।
- बिथोड़ा का युद्ध: कुशालसिंह ने जोधपुर सेना (अनार सिंह) को हराया।
- चेलावास का युद्ध (18 सितंबर): “कालों-गौरों का युद्ध”। इसमें मेकमोसन का सिर काटकर आउवा किले के दरवाजे पर लटका दिया गया।
4. कोटा का जन-विद्रोह (15 अक्टूबर 1857)
यह राजस्थान का सबसे व्यवस्थित और शक्तिशाली जन-विद्रोह था। नेतृत्व लाला जयदयाल और मेहराबखाँ ने किया। मेजर बर्टन का सिर काटकर पूरे शहर में घुमाया गया।
🌍 अन्य रियासती हलचल
- बीकानेर: महाराजा सरदारसिंह राजस्थान के एकमात्र शासक थे जो सेना लेकर विद्रोहियों को दबाने राज्य से बाहर (हिसार/बडालु) तक गए।
- धौलपुर: यहाँ ग्वालियर और इंदौर के क्रांतिकारियों ने 2 महीने तक शासन किया।
- जयपुर: राजा और जनता दोनों ने अंग्रेजों का साथ दिया। महाराजा को ‘सितार-ए-हिन्द’ की उपाधि मिली।
👤 प्रमुख क्रांतिकारी एवं नायक
- अमर चन्द्र बांठिया: बीकानेर निवासी, ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई की आर्थिक मदद की। इन्हें “1857 की क्रांति का भामाशाह” और राजस्थान का “मंगल पांडे” कहा जाता है।
- तात्या टोपे: भीलवाड़ा (कुआड़ा) से प्रवेश किया। जैक्सन और रॉबर्ट्स से लोहा लिया। अंततः मानसिंह नरुका के विश्वासघात के कारण 8 अप्रैल 1859 को फांसी दी गई।
- डूंगजी-जवारजी: शेखावाटी के लोकदेवता जिन्होंने अंग्रेज छावनियों (नसीराबाद) को लूटा।
- सुजा कँवर राजपुरोहित: लाडनूँ की वीरांगना जिन्होंने पुरुष वेश में अंग्रेजों का मुकाबला किया।
📚 साहित्य एवं प्रभाव
बांकीदास (मारवाड़): ‘आयो अंग्रेज मुलक रै ऊपर’ कविता से चेतना जगाई।
सूर्यमल्ल मिश्रण (बूँदी): ‘वीर सतसई’ के माध्यम से क्रांतिकारियों को प्रेरित किया।
परिणाम: ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त होकर सत्ता ब्रिटिश क्राउन के पास गई। ‘गोद निषेध’ सिद्धांत समाप्त हुआ और सामंतों की शक्ति कम की गई।