महाराणा सांगा

महाराणा सांगा – मेवाड़ का इतिहास

🚩 महाराणा सांगा (1509-1528 ई.)

हिंदुआ सूरज – मेवाड़ का गौरवशाली अध्याय

🛡️ प्रारंभिक जीवन और राज्याभिषेक

  • प्रसिद्ध नाम: महाराणा सांगा (संग्रामसिंह)।
  • समकालीन शासक:
    • दिल्ली: सुल्तान सिकंदर लोदी
    • गुजरात: महमूद बेगड़ा
    • मालवा: नासिर शाह/नासिरुद्दीन खिलजी

🤝 ठाकुर कर्मचंद का योगदान

सांगा के कठिन समय में ठाकुर कर्मचंद ने उन्हें शरण दी थी। गद्दी पर बैठने के बाद सांगा ने उन्हें अजमेर, परबतसर, मांडल जैसी ₹15 लाख वार्षिक आय वाली जागीरें दीं और ‘रावत’ की उपाधि से सम्मानित किया।

📍 सीमा सुरक्षा और सामरिक मित्रता

  • उत्तर-पूर्वी मेवाड़: ठाकुर कर्मचंद के माध्यम से सुरक्षित किया।
  • दक्षिण और पश्चिमी मेवाड़: सिरोही और वागड़ के शासकों से मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए।
  • ईडर राज्य: अपने समर्थक रायमल को ईडर के सिंहासन पर बैठाया।
  • मारवाड़: वहां के शासक को भी अपना सहयोगी बनाया।

🙏 रावत सारंगदेव का सम्मान

युवावस्था में सांगा के प्राण बचाने वाले रावत सारंगदेव के उपकारों को सांगा कभी नहीं भूले। उन्होंने उनके पुत्र रावत जोगा को पुरस्कृत किया और उनके वंशजों को ‘सारंगदेवोत’ कहलाने का गौरव दिया।


⚔️ गुजरात-मेवाड़ संघर्ष

महाराणा कुम्भा के समय से चले आ रहे संघर्ष को सांगा ने जारी रखा। मुख्य विवाद ईडर के उत्तराधिकार को लेकर था।

  1. रायमल ने मेवाड़ में शरण ली, सांगा ने अपनी पुत्री का विवाह उनसे तय किया।
  2. 1515 ई.: सांगा ने भारमल को हटाकर रायमल को वास्तविक शासक बनाया।
  3. 1520 ई.: सांगा ने स्वयं बड़ी सेना के साथ अहमदनगर के किले को घेरकर विजय प्राप्त की।
  4. गुजरात का सुल्तान मुजफ्फर लज्जित होकर सांगा से संधि करने पर विवश हुआ।

🏯 मेवाड़ और मालवा संबंध

  • मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी द्वितीय के समय राजपूत सरदार मेदनीराय का प्रभाव बढ़ा।
  • जब मेदनीराय को मांडू से निकाला गया, तो सांगा ने उन्हें गागरोण और चंदेरी की जागीरें दीं।
  • सांगा ने मेदनीराय का पक्ष लेकर मालवा पर मेवाड़ का प्रभाव अत्यधिक सुदृढ़ कर दिया।

🏛️ स्थापत्य एवं प्रमुख स्मारक

चित्तौड़गढ़ पुनर्निर्माण
अचलगढ़ दुर्ग (सिरोही)
बसंती दुर्ग
मचान दुर्ग

🎨 विजय स्तम्भ (1437-1448 ई.)

  • निर्माण: मालवा विजय के उपलक्ष्य में (9 मंजिला, 122 फीट ऊँची)।
  • शिल्पी: जैता और उनके पुत्र (नापा, पोमा, पूँजा)।
  • विशेषता: इसे ‘मूर्तिकला का अजायबघर’ कहा जाता है। 1949 में इस पर डाक टिकट जारी हुआ।
  • कर्नल जेम्स टॉड ने इसे कुतुब मीनार से भी श्रेष्ठ बताया है।

💎 अन्य प्रमुख मंदिर

  • रणकपुर मंदिर: उत्कृष्ट जैन मंदिर (शिल्पी देपाक)।
  • कुम्भस्वामी मंदिर: चित्तौड़गढ़ दुर्ग।
  • मीरा मंदिर: एकलिंगजी क्षेत्र।
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