राजस्थान का आंतरिक अपवाह तंत्र

राजस्थान की आंतरिक प्रवाह की नदियाँ – नोट्स

🌊 राजस्थान का आंतरिक अपवाह तंत्र

परिभाषा: वे नदियाँ जिनका जल समुद्र तक नहीं पहुँच पाता है और अपने प्रवाह क्षेत्र में ही विलुप्त हो जाती हैं, आंतरिक प्रवाह की नदियाँ कहलाती हैं।
नदी का नाम उद्गम स्थान प्रवाह / विलुप्ति मुख्य विशेषताएँ
1. घग्घर नदी शिवालिक पहाड़ियाँ (HP) हनुमानगढ़, पाकिस्तान (हकरा) सबसे लंबी आंतरिक नदी (465 किमी)। इसे मृत नदी भी कहते हैं।
2. कांतली नदी खंडेला (सीकर) झुंझुनू, चूरू सीमा पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली सबसे लंबी नदी (100 किमी)। गणेश्वर सभ्यता।
3. काकनेय (मसूरदी) कोटरी गाँव (जैसलमेर) बुझ झील सबसे छोटी आंतरिक नदी (17 किमी)। जैसलमेर में प्रवाहित।
4. साबी नदी सेवर पहाड़ियाँ (जयपुर) पटौदी (हरियाणा) मानसून में विनाशकारी। जोधपुरा सभ्यता इसके किनारे स्थित।
5. रूपारेल उदयनाथ (अलवर) डीग, भरतपुर इसे ‘लसवारी’ या ‘वाराह नदी’ भी कहा जाता है।

नदियों का विस्तृत विवरण

1. घग्घर नदी (Saraswati / Dead River)

  • उपनाम: मृत नदी, नट नदी, सोत्तर नदी, सरस्वती, दृषद्वती।
  • हिमाचल प्रदेश के कालका के पास शिवालिक की पहाड़ियों से निकलती है।
  • राजस्थान में हनुमानगढ़ के टिब्बी तहसील से प्रवेश करती है।
  • पाकिस्तान में इसके बहाव क्षेत्र को हकरा कहा जाता है।
  • कालीबंगा और रंगमहल जैसी प्राचीन सभ्यताएं इसके किनारे विकसित हुई थीं।

2. कांतली नदी

  • यह सीकर के खंडेला पहाड़ियों से निकलकर झुंझुनू को दो भागों में बांटती है।
  • इसके बहाव क्षेत्र को तोरावाटी कहा जाता है।
  • प्रसिद्ध गणेश्वर सभ्यता इसी के तट पर स्थित है।

3. साबी नदी

  • जयपुर ग्रामीण के सेवर की पहाड़ियों से उद्गम।
  • यह हरियाणा के गुड़गांव (पटौदी) के मैदानों में विलुप्त हो जाती है।
  • अकबर ने इस पर पुल बनाने का कई बार प्रयास किया पर असफल रहा।

4. द्रव्यवती नदी (Life Line of Jaipur)

  • इसे स्थानीय भाषा में अमानीशाह का नाला कहा जाता था।
  • वर्तमान में जयपुर शहर में इसे साबरमती की तर्ज पर पर्यटन हेतु विकसित किया गया है।
💡 सांभर झील में गिरने वाली नदियाँ:
  • मंथा (मेंढा): उत्तर दिशा से गिरती है (सर्वाधिक लवण लाती है)।
  • रूपनगढ़: दक्षिण दिशा (अजमेर) से गिरती है।
  • खारी और खंडेला: अन्य सहायक नदियाँ।
राजस्थान भूगोल नोट्स – जल संसाधन एवं अपवाह तंत्र

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