राजस्थान का अपवाह तंत्र: बंगाल की खाड़ी
राजस्थान में अरावली पर्वतमाला जल-विभाजक का कार्य करती है। यहाँ के अपवाह तंत्र को तीन समूहों में बाँटा गया है, जिनमें से बंगाल की खाड़ी का अपवाह तंत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अपवाह तंत्र के तीन भाग:
- बंगाल की खाड़ी का अपवाह तंत्र
- अरब सागर का अपवाह तंत्र
- आंतरिक अपवाह तंत्र
1. चंबल नदी (चर्मण्वती)
चंबल राजस्थान की सबसे लंबी और एकमात्र बारहमसी नदी है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| उद्गम स्थल | जानापाव पहाड़ियाँ (महू, मध्य प्रदेश) |
| लंबाई | 966 किमी (राजस्थान में लगभग 135-153 किमी) |
| सीमा | राजस्थान और म.प्र. के बीच 250 किमी अंतर्राज्यीय सीमा |
| जलप्रपात | चूलिया जलप्रपात (18 मीटर) – चित्तौड़गढ़ |
| विशेष जीव | गांगेय सूस (डॉल्फिन) और घड़ियाल |
चंबल घाटी परियोजना (प्रमुख बांध)
- गांधी सागर बांध: मंदसौर (म.प्र.) – सबसे बड़ा बांध।
- राणा प्रताप सागर बांध: रावतभाटा (चित्तौड़गढ़) – राजस्थान में भराव क्षमता में बड़ा।
- जवाहर सागर बांध: कोटा – पिकअप बांध।
- कोटा बैराज: कोटा – केवल सिंचाई हेतु।
डांग क्षेत्र: चंबल नदी के बहाव क्षेत्र में गहरी कंदराओं और गड्ढों वाला क्षेत्र ‘डांग’ या ‘दस्यु प्रभावित क्षेत्र’ कहलाता है। सर्वाधिक अवनालिक अपरदन चंबल में ही होता है।
चंबल की सहायक नदियाँ
- काली सिंध: उद्गम देवास (म.प्र.), संगम नौनेरा (कोटा)।
- आहू: गागरोन दुर्ग के पास कालीसिंध में मिलती है।
- पार्वती: उद्गम सिहोर (म.प्र.), संगम पालिया (स.मा.)।
- परवन: इसके किनारे शेरगढ़ अभयारण्य स्थित है।
- मेज: उद्गम भीलवाड़ा, संगम लाखेरी (बूंदी)।
2. बनास नदी (वन की आशा)
पूरी तरह से राजस्थान में बहने वाली सबसे लंबी नदी।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| उद्गम | खमनोर की पहाड़ियाँ (कुंभलगढ़, राजसमंद) |
| लंबाई | 480 किमी (पूर्णतः राजस्थान में) |
| संगम | रामेश्वरम् (सवाई माधोपुर) – चंबल में |
| प्रमुख बांध | बीसलपुर बांध (टोंक), ईसरदा बांध (स.मा.) |
| सर्वाधिक जल ग्रहण | 46,570 वर्ग किमी (राजस्थान में सबसे बड़ा) |
बनास की सहायक नदियाँ
- बेड़च (आयड़): गोगुंदा से उद्गम, उदयसागर झील के बाद ‘बेड़च’ कहलाती है। इसके किनारे आहड़ सभ्यता विकसित हुई।
- कोठारी: दिवेर (राजसमंद) से उद्गम। इस पर मेजा बांध बना है।
- खारी: बिजराल ग्राम (राजसमंद) से उद्गम, देवली में संगम।
- मोरेल: जयपुर से उद्गम, सवाई माधोपुर में संगम।
- कालीसिल: इसके किनारे प्रसिद्ध कैला देवी मंदिर स्थित है।
3. अन्य महत्वपूर्ण नदियाँ
बाणगंगा नदी (अर्जुन की गंगा)
- उद्गम: बैराठ की पहाड़ियाँ (कोटपूतली-बहरोड़)।
- विशेष: इसे ‘रुण्डित सरिता’ भी कहा जाता है। बैराठ सभ्यता इसी के किनारे विकसित हुई।
गंभीर नदी
- उद्गम: सपोटरा (करौली)।
- विशेष: खानवा का ऐतिहासिक मैदान इसी नदी के पास स्थित था।
🏰 प्रमुख दुर्ग और नदियाँ (संगम स्थल)
| दुर्ग (किला) | नदियों का संगम / किनारा |
|---|---|
| गागरोन दुर्ग (जलदुर्ग) | आहू और कालीसिंध (झालावाड़) |
| भैंसरोड़गढ़ दुर्ग | चंबल और बामनी (चित्तौड़गढ़) |
| चित्तौड़गढ़ दुर्ग | गंभीरी और बेड़च |
| शेरगढ़ किला | परवन नदी (बारां) |
| मनोहर थाना दुर्ग | परवन और कालीखाड़ |
| गढ़ पैलेस | चंबल नदी (कोटा) |
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