राजस्थान का परिचय और मुख्य तथ्य

राजस्थान का इतिहास और परिचय
🚩 वैदिक काल में ‘ब्रह्मवर्त’ और रामायण काल में ‘मरुकांतर’

1. इतिहास और प्राचीन नाम

  • वैदिक काल में इसे ‘ब्रह्मवर्त’ और रामायण काल में ‘मरुकांतर’ कहा गया।
  • राजस्थान शब्द का सबसे प्राचीन उल्लेख वि. संवत 682 में वसंतगढ़ (सिरोही) के शिलालेख में मिलता है।
  • जार्ज थामस ने 1800 ईस्वी में इसे सर्वप्रथम ‘राजपुताना’ कहा।
  • बाद में, कर्नल जेम्स टॉड ने इसे ‘रायथान’ कहा, और उनकी पुस्तक “Annals and Antiquities of Rajasthan” के माध्यम से ‘राजस्थान’ शब्द का प्रचलन हुआ।

2. कर्नल जेम्स टॉड (घोड़े वाला बाबा)

उनकी पुस्तक और योगदान:

  • इन्होंने अपनी पुस्तक “Annals and Antiquities of Rajasthan” में राजस्थान के इतिहास को दर्ज किया।
  • इसका हिंदी अनुवाद गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने “प्राचीन राजस्थान का विश्लेषण” नाम से किया।
  • कर्नल टॉड 1818-1821 के दौरान मेवाड़ क्षेत्र में ब्रिटिश पॉलिटिकल एजेंट थे।
“अपने ऐतिहासिक शोध और घुड़सवारी के कारण उन्हें स्थानीय लोग ‘घोड़े वाला बाबा’ कहकर संबोधित करते थे।”

3. राजस्थान का एकीकरण एवं दिवस

  • 30 मार्च 1949 को जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर राज्यों के मिलने से “वृहद राजस्थान” का गठन हुआ।
  • इसी कारण हर वर्ष 30 मार्च को ‘राजस्थान दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
© राजस्थान सामान्य ज्ञान – मोबाइल फ्रेंडली नोट्स

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