मीणा जनजाति

मीणा जनजाति – राजस्थान की जनजातियाँ

🏺 मीणा जनजाति

राजस्थान की सबसे सम्पन्न और शिक्षित जनजाति

शाब्दिक अर्थ मीन (मछली)
बाहुल्य क्षेत्र जयपुर (पूर्वी राजस्थान)
जनसंख्या भारत में सबसे अधिक
मुख्य ग्रंथ मीणा पुराण
💡 ऐतिहासिक तथ्य: कछवाहा वंश (जयपुर) के शासन से पूर्व आमेर क्षेत्र पर मीणाओं का शासन था।

📖 धार्मिक एवं आध्यात्मिक पक्ष

  • गुरु: आचार्य मुनि मगन सागर।
  • ग्रंथ: ‘मीणा पुराण’ (मुनि मगन सागर द्वारा रचित)।
  • कुल देवता: भूरिया बाबा / गोतमेश्वर।
  • कुल देवी: जीणमाता (रेवासा, सीकर)।
  • बुझ देवता: मीणा जाति के देवी-देवताओं को ‘बुझ देवता’ कहा जाता है।

🛡️ मीणा वर्गों का विभाजन

1. चौकीदार मीणा

इनका कार्य राजकीय खजाने और किलों की सुरक्षा करना था।

2. जमीदार मीणा

ये मुख्य रूप से खेती और पशुपालन का कार्य करते हैं।

3. पडिहार मीणा

टोंक व बूंदी क्षेत्र में मिलते हैं। (भैंस का मांस खाने वाले)।

4. अन्य वर्ग

चर्मकार (चमड़ा), रावत (स्वर्ण राजपूतों से संबद्ध) और सुरतेवाला मीणा।

🏠 पंचायत एवं सामाजिक व्यवस्था

इकाई कहा जाता है
गांव ढाणी
गांव का मुखिया पटेल
सबसे बड़ी पंचायत चैरासी पंचायत

⚖️ विशेष सामाजिक प्रथाएँ

1. नाता (नतारा) प्रथा:

इसमें विवाहित स्त्री अपने पति और बच्चों को छोड़कर दूसरे पुरुष के साथ पत्नी के रूप में रहने लगती है।

2. छेड़ा फाड़ना:

यह एक प्रकार की तलाक प्रथा है। पति अपनी पत्नी को नई साड़ी के पल्लू में रुपया बांधकर उसे फाड़कर पहनाता है। इसके बाद स्त्री परित्यक्त मानी जाती है।

3. झगड़ा राशि:

यदि कोई पुरुष किसी दूसरे की पत्नी को भगाकर ले जाता है, तो उसे हर्जाने के रूप में पंचायत द्वारा तय ‘झगड़ा राशि’ का भुगतान करना पड़ता है।

🎡 प्रमुख मेले

  • भूरिया बाबा का मेला: अरणोद (प्रतापगढ़) में वैसाख पूर्णिमा को विशाल मेला भरता है।
  • जीणमाता का मेला: रेवासा (सीकर) में नवरात्रि के अवसर पर आयोजित होता है।
राजस्थान सामान्य ज्ञान – जनजातीय संस्कृति नोट्स

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *