🛡️ वंश की उत्पत्ति एवं स्थापना
- उत्पत्ति: कछवाहा वंश भगवान राम के ज्येष्ठ पुत्र कुश के वंशज माने जाते हैं।
- दुल्हाराय (तेजकरण): 1137 ई. में दौसा के बड़गुर्जरों को हराकर नींव रखी।
- जमवाय माता: इन्होंने मांची को जीतकर ‘रामगढ़’ नाम दिया और कुलदेवी जमवाय माता का मंदिर बनवाया।
- आमेर की स्थापना: 1207 ई. में कोकिल देव ने मीणाओं को हराकर आमेर को राजधानी बनाया।
⭐ विशेष परीक्षा उपयोगी तथ्य:
• आमेर की मीरां: बाला बाई (पृथ्वीराज कछवाहा की पत्नी)
• राजस्थान की राधा: मीरांबाई
• राजस्थान की दूसरी मीरां: रानाबाई
• राजस्थान की राधा: मीरांबाई
• राजस्थान की दूसरी मीरां: रानाबाई
👑 राजा भारमल (1547-1574 ई.)
- प्रथम मुगल संधि: भारमल पहले राजपूत शासक थे जिन्होंने अकबर की अधीनता स्वीकार की (1562, सांगानेर)।
- वैवाहिक संबंध: 6 फरवरी 1562 को सांभर में पुत्री हरकाबाई (मरियम उज जमानी) का विवाह अकबर से किया।
- उपाधि: ‘अमीर-उल-उमरा’ और 5000 का मनसब।
⚔️ मिर्जा राजा मानसिंह I (1589-1614 ई.)
- उपाधि: अकबर ने इन्हें ‘फरजन्द’ (बेटा) की उपाधि दी।
- मनसब: मुगल दरबार में सर्वाधिक 7000 का मनसब प्राप्त था।
- विजय अभियान: काबुल, बिहार, बंगाल और ओडिशा में मुगल साम्राज्य का विस्तार किया।
- स्थापत्य: आमेर में शिला देवी मंदिर और वृंदावन में गोविंद देव जी मंदिर का निर्माण।
📜 मिर्जा राजा जयसिंह (1621-1667 ई.)
- सेवा काल: तीन मुगल सम्राटों (जहाँगीर, शाहजहाँ, औरंगजेब) का काल देखा।
- पुरंदर की संधि (1665): औरंगजेब की ओर से शिवाजी महाराज के साथ ऐतिहासिक समझौता।
- साहित्य: इनके दरबारी कवि बिहारी ने ‘बिहारी सतसई’ की रचना की।
🔭 सवाई जयसिंह द्वितीय (1700-1743 ई.)
- उपाधि: औरंगजेब द्वारा ‘सवाई’ की उपाधि से सम्मानित।
- जयपुर की स्थापना: 18 नवंबर 1727 को जयपुर नगर बसाया (वास्तुकार: विद्याधर भट्टाचार्य)।
- खगोल विज्ञान: 5 वेधशालाओं (जंतर-मंतर) का निर्माण कराया (जयपुर, दिल्ली, मथुरा, उज्जैन, बनारस)।
- अश्वमेध यज्ञ: यह अश्वमेध यज्ञ कराने वाले अंतिम हिन्दू शासक थे।
🎨 सवाई प्रतापसिंह (1778-1803 ई.)
- हवा महल: 1799 ई. में 5 मंजिला हवा महल बनवाया (बिना नींव की इमारत)।
- कला प्रेम: ‘ब्रजनिधि’ नाम से कविताएँ लिखते थे। ‘गंधर्व बाईसी’ इनके दरबार की शोभा थी।
🌸 सवाई रामसिंह द्वितीय (1835-1880 ई.)
- पिंक सिटी: 1876 में प्रिंस अल्बर्ट के आगमन पर जयपुर को गेरुआ/गुलाबी रंग से रंगवाया।
- आधुनिकता: महाराजा कॉलेज, संस्कृत कॉलेज और रामनिवास बाग का निर्माण।
💎 सवाई माधोसिंह द्वितीय (1880-1922 ई.)
- उपनाम: ‘बब्बर शेर’ के नाम से प्रसिद्ध।
- विश्व रिकॉर्ड: सिटी पैलेस में रखे चांदी के विशाल पात्र (गंगाजली) दुनिया के सबसे बड़े चांदी के बर्तन हैं।
🦌 अलवर रियासत का इतिहास
नरूका राजवंश की गौरवशाली गाथा
📍 मुख्य ऐतिहासिक बिंदु
- स्वतंत्र स्थापना: 1775 ई. में राव राजा प्रतापसिंह ने अलवर को स्वतंत्र रियासत बनाया।
- महाराजा विनयसिंह: इन्होंने अपनी माता की स्मृति में 80 खंभों वाली मूसी महारानी की छतरी बनवाई।
- सिलीसेढ़ झील: इसे ‘राजस्थान का नंदन कानन’ कहा जाता है।
- महाराजा जयसिंह:
- 1903 में बाल विवाह विरोधी कानून बनाया।
- प्रथम गोलमेज सम्मेलन (लंदन) में भाग लिया।
- विलेय: आजादी के समय यहाँ के शासक तेजसिंह थे। अलवर ‘मत्स्य संघ’ का हिस्सा बना।
