महाराणा प्रताप

महाराणा प्रताप: मेवाड़ का स्वाभिमान

🚩 महाराणा प्रताप (1572-1597 ई.)

मेवाड़ केसरी और स्वाभिमान के अद्वितीय प्रतीक

📍 जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

  • जन्म: 9 मई, 1540 ई. (कुम्भलगढ़ के बादल महल में)।
  • माता-पिता: महाराणा उदयसिंह और माता जैवन्ता बाई।
  • बचपन का नाम: कीका (स्थानीय भाषा में ‘छोटा बच्चा’)।
  • विवाह: 17 वर्ष की आयु में अजबदे पंवार से, जिनसे अमरसिंह का जन्म हुआ।

👑 सिंहासन का संघर्ष और राज्याभिषेक

उदयसिंह ने जगमाल को उत्तराधिकारी बनाया था, लेकिन मेवाड़ के सरदारों ने परंपरा और योग्यता के आधार पर प्रताप का समर्थन किया।

  • coronation: 28 फरवरी, 1572 को गोगुंदा में।
  • विद्रोही जगमाल: सिंहासन न मिलने पर जगमाल अकबर की शरण में चला गया, जिसे अकबर ने जहाजपुर की जागीर दी।

🤝 अकबर के चार शांति प्रस्ताव (शिष्टमंडल)

अकबर ने युद्ध से पहले प्रताप को समझाने के लिए चार दूत भेजे, जो सभी असफल रहे:

क्रम दूत का नाम समय
1 जलाल खाँ कोरची नंवबर, 1572
2 कुंवर मानसिंह जून, 1573
3 राजा भगवंतदास सितंबर, 1573
4 राजा टोडरमल दिसंबर, 1573

⚔️ हल्दीघाटी का ऐतिहासिक युद्ध (18 जून, 1576)

युद्ध के उपनाम:
  • कर्नल टॉड: मेवाड़ की थर्मोपल्ली
  • अबुल फजल: खमनौर का युद्ध
  • बदायूंनी: गोगुंदा का युद्ध

🐎 चेतक और हाथियों का पराक्रम

  • रामप्रसाद हाथी: प्रताप का प्रसिद्ध हाथी जिसे मुगलों ने पकड़ लिया और अकबर ने उसका नाम पीरप्रसाद रखा।
  • चेतक का बलिदान: युद्ध में मानसिंह के हाथी ‘मर्दाना’ पर हमला करते समय चेतक घायल हो गया। घायल अवस्था में उसने प्रताप को सुरक्षित निकाला और बलीचा गाँव के पास अंतिम सांस ली।
  • झाला बीदा: जब प्रताप संकट में थे, झाला बीदा ने राजकीय छत्र धारण कर मुगलों को भ्रमित किया और स्वयं वीरगति प्राप्त की।

🛡️ प्रताप की युद्ध रणनीति

  • स्वभूमिध्वंस नीति: उपजाऊ क्षेत्रों को नष्ट करना ताकि मुगल सेना को रसद न मिले।
  • छापामार (Guerilla) युद्ध: पहाड़ियों और जंगलों का उपयोग कर अचानक हमले करना।
  • भील सेना: राणा पूंजा के नेतृत्व में भीलों को संगठित कर सेना में उच्च पद दिए।

🏆 दिवेर का युद्ध (1582): ‘मेवाड़ का मैराथन’

दिवेर के युद्ध में प्रताप ने मुगलों की चौकियों पर भीषण हमला किया। कुंवर अमरसिंह ने सुल्तान खान को अपने भाले से मारकर विजय प्राप्त की। कर्नल टॉड ने इसे ‘मेवाड़ का मैराथन’ कहा।

💰 भामाशाह का योगदान

जब प्रताप आर्थिक संकट में थे, तब दानवीर भामाशाह ने चूलिया गाँव में अपनी सारी संपत्ति (25 लाख रुपये और 20 हजार अशर्फियां) प्रताप को समर्पित कर दी। इससे 25,000 सैनिकों का खर्च 12 वर्षों तक उठाया जा सका।

🕯️ अंतिम समय और विरासत

  • राजधानी: 1585 में प्रताप ने चावंड को अपनी आपातकालीन राजधानी बनाया।
  • मृत्यु: 19 जनवरी, 1597 को 57 वर्ष की आयु में चावंड में।
  • स्मारक: बांडोली गाँव (चावंड के पास) में प्रताप की 8 खंभों की छतरी बनी हुई है।

⭐ निष्कर्ष

महाराणा प्रताप ने अपने जीवन के 25 वर्षों के शासनकाल में कभी अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की। उन्होंने सिद्ध किया कि स्वाधीनता से बढ़कर कुछ भी नहीं है। उनके साहस और त्याग के कारण उन्हें ‘मेवाड़ केसरी’ और ‘हिंदुआ सूरज’ के नाम से याद किया जाता है।

राजस्थान सामान्य ज्ञान – इतिहास संकलन

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