🏰 मेवाड़ का इतिहास: गुहिल-सिसोदिया राजवंश
📍 भूगोल एवं नामकरण: उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ का क्षेत्र मेवाड़ कहलाता है। इसके प्राचीन नाम शिवि, प्राग्वाट, मेद्पाट हैं। मेद जाति के कारण इसका नाम मेद्पाट पड़ा।
📜 राजवंश की उत्पत्ति के मत
- अबुल फजल: ईरान के बादशाह नौशेरवां आदिल की संतान।
- जी.एच. ओझा: विशुद्ध सूर्यवंशी क्षत्रिय।
- भंडारकर एवं गोपीनाथ शर्मा: ब्राह्मण वंशीय।
- कर्नल टॉड: वल्लभी के शासकों के वंशज।
⚔️ बप्पा रावल (कालभोज) – 728-753 ई.
- हारीत ऋषि के आशीर्वाद से 734 ई. में मान मोरी को हराकर चित्तौड़ जीता।
- राजधानी: नागदा। कैलाशपुरी में एकलिंगजी मंदिर का निर्माण कराया।
- उपाधियाँ: हिंदू सूर्य, राजगुरु, चक्कवै।
- सी.वी. वैद्य ने इनकी तुलना ‘चार्ल्स मार्टेल’ से की है।
🛡️ रावल रतन सिंह (1302-1303 ई.)
- अलाउद्दीन खिलजी ने 1303 में चित्तौड़ पर आक्रमण किया।
- चित्तौड़ का प्रथम साका: रानी पद्मिनी ने 1600 स्त्रियों के साथ जौहर किया। गोरा और बादल वीरगति को प्राप्त हुए।
- खिलजी ने चित्तौड़ का नाम बदलकर खिज्राबाद रखा।
🔥 राणा हमीर (1326-1364 ई.)
- मेवाड़ का उद्धारक; सिसोदिया शाखा की स्थापना की।
- उपाधि: विषम घाटी पंचानन (कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति के अनुसार)।
- सिंगोली के युद्ध में मुहम्मद बिन तुगलक को पराजित किया।
🎨 महाराणा कुम्भा (1433-1468 ई.)
- स्थापत्य का स्वर्णकाल: विजय स्तम्भ (सारंगपुर विजय की स्मृति में) और कुम्भलगढ़ दुर्ग का निर्माण।
- संगीत ग्रंथ: संगीतराज (5 भाग), संगीत मीमांसा, सूडप्रबंध।
- उपाधियाँ: अभिनव भरताचार्य, हिंदू सुरताण, हालगुरु, छापगुरु।
- दरबारी विद्वान: मंडन (वास्तुकार), कान्हड़ व्यास (एकलिंग महात्म्य)।
⚔️ महाराणा सांगा (1509-1528 ई.)
- उपनाम: सैनिकों का भग्नावशेष (कर्नल टॉड)। शरीर पर 80 घाव थे।
- प्रमुख युद्ध: खातोली (1517), बाड़ी (1518), गागरोण (1519), बयाना (1527)।
- खानवा का युद्ध (17 मार्च 1527): बाबर के विरुद्ध अंतिम निर्णायक युद्ध।
- कर्मचंद पंवार ने कठिन समय में सांगा को शरण दी थी।
🤱 पन्ना धाय एवं उदय सिंह (1537-1572 ई.)
- पन्ना धाय ने अपने पुत्र चंदन का बलिदान देकर उदय सिंह की जान बचाई।
- उदय सिंह ने 1559 में उदयपुर शहर बसाया।
- 1567-68 में अकबर का आक्रमण; जयमल और फत्ता वीरगति को प्राप्त हुए (तृतीय साका)।
🚩 महाराणा प्रताप (1572-1597 ई.)
- जन्म: 9 मई 1540 (कुम्भलगढ़)। बचपन का नाम – कीका।
- हल्दीघाटी युद्ध (18 जून 1576): अकबर के सेनापति मानसिंह के विरुद्ध संघर्ष। अबुल फजल ने इसे ‘खमनोर का युद्ध’ कहा।
- दिवेर का युद्ध (1582): ‘मेवाड़ का मैराथन’ (कर्नल टॉड)।
- अंतिम राजधानी: चावंड।
🤝 महाराणा अमर सिंह I एवं मुगल-मेवाड़ संधि
- 5 फरवरी 1615 को मुगलों से संधि की।
- अमर सिंह इस संधि से दुखी होकर एकांतवास में चले गए।
- आहड़ में मेवाड़ के महाराणाओं की प्रथम छतरी अमर सिंह की ही है।
🏛️ महाराणा राज सिंह (1652-1680 ई.)
- औरंगजेब के जजिया कर का विरोध किया। चारुमती (किशनगढ़) से विवाह किया।
- राजसमंद झील का निर्माण कराया। यहाँ विश्व की सबसे बड़ी प्रशस्ति राजप्रशस्ति स्थित है।
- हाड़ी रानी (सहल कंवर): पति रतन सिंह चुंडावत को अपना सिर काटकर निशानी के रूप में दिया।
💡 विशेष तथ्य: महाराणा जगत सिंह द्वितीय ने 1734 में हुरड़ा सम्मेलन की अध्यक्षता की थी, जिसका उद्देश्य मराठों को राजस्थान से बाहर निकालना था।
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