⚔️ राजस्थान के राजपूत राजवंश: इतिहास एवं उत्पत्ति
1. कालावधि: हर्षवर्धन की मृत्यु (648 ई.) से दिल्ली सल्तनत की स्थापना (1206 ई.) तक।
2. प्रमुख राजपूत वंश: गुर्जर प्रतिहार, चौहान, गुहिल, परमार, चालुक्य, राठौड़।
2. प्रमुख राजपूत वंश: गुर्जर प्रतिहार, चौहान, गुहिल, परमार, चालुक्य, राठौड़।
🛡️ राजपूतों की उत्पत्ति के विभिन्न सिद्धांत
1. अग्निकुंड से उत्पत्ति
- स्रोत: चंदबरदाई का प्रसिद्ध ग्रंथ ‘पृथ्वीराजरासो’।
- सिद्धांत: ऋषि वशिष्ठ के आबू पर्वत पर किए गए यज्ञ कुण्ड से चार वंश उत्पन्न हुए – प्रतिहार, परमार, चालुक्य और चौहान।
- आलोचना: गौरीशंकर हीराचंद ओझा और दशरथ शर्मा जैसे इतिहासकारों ने इसे निराधार माना। यह संभवतः विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध संगठित शक्ति का प्रतीकात्मक चित्रण है।
2. प्राचीन क्षत्रियों से उत्पत्ति
- प्रस्तावक: डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा।
- आधार: शिलालेखों के अनुसार राजपूत प्राचीन सूर्यवंशीय और चंद्रवंशीय क्षत्रियों के वंशज हैं।
- मान्यता: यह सिद्धांत इतिहासकारों के बीच सर्वाधिक स्वीकृत है।
3. विदेशी उत्पत्ति सिद्धांत
- प्रस्तावक: कर्नल जेम्स टॉड (घोड़े वाले बाबा)।
- तर्क: शक, सीथियन और हूणों से रीति-रिवाजों (सूर्य पूजा, अश्वमेध यज्ञ) की समानता के आधार पर।
- भंडारकर का मत: डॉ. डी.आर. भंडारकर ने इन्हें गुर्जरों और श्वेत-हूणों से जोड़ा और बिजौलिया शिलालेख के आधार पर कुछ को ब्राह्मण मूल का बताया।
🏰 राजस्थान के प्रमुख राजपूत राजवंश
1. मेवाड़ के गुहिल
- आदिपुरुष: गुहिल।
- विशेषता: ओझा इन्हें सूर्यवंशीय मानते हैं, जबकि भंडारकर इन्हें ब्राह्मण मूल का मानते हैं। गुहिल वंश ने मेवाड़ में विश्व का सबसे लंबे समय तक चलने वाला शासन स्थापित किया।
2. मारवाड़ के गुर्जर-प्रतिहार
- विस्तार: छठी शताब्दी के दौरान राजस्थान में सर्वप्रथम राज्य स्थापित किया।
- राजधानी: चीनी यात्री युवानच्वांग ने इनकी राजधानी को ‘पीलो मोलो’ (भीनमाल) कहा।
- शाखाएँ: मुँहणोत नैणसी के अनुसार इनकी 26 शाखाएँ थीं, जिनमें मण्डौर प्रमुख थी।
3. आबू के परमार
- अर्थ: परमार का शाब्दिक अर्थ है ‘शत्रु को मारने वाला’।
- आदिपुरुष: धूमराज (वंशावली उत्पलराज से शुरू)।
- प्रभाव: आबू के आसपास से शुरू होकर इन्होंने मालवा, वागड़ और गुजरात तक अपना राज्य फैलाया।
4. सांभर के चौहान
- मूल स्थान: सपादलक्ष और जांगल प्रदेश।
- राजधानी: अहिच्छत्रपुर (नागौर)।
- आदिपुरुष: वासुदेव (समय: 551 ई.)।
- विशेष तथ्य: बिजौलिया शिलालेख के अनुसार वासुदेव ने ही सांभर झील का निर्माण करवाया था।
अन्य प्रमुख वंश:
- आम्बेर के कछवाहा: जयपुर और आसपास का क्षेत्र।
- जैसलमेर के भाटी: थार के मरुस्थल के प्रहरी।
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