राजस्थान के किसान एवं जनजातीय आंदोलन

राजस्थान के किसान एवं जनजातीय आंदोलन – सम्पूर्ण नोट्स

🌾 राजस्थान के किसान एवं जनजातीय आंदोलन

सामंती शोषण के विरुद्ध स्वाभिमान की गौरवगाथा

🚜 बिजौलिया किसान आंदोलन (1897-1941)

विशेषता: यह विश्व का सबसे लंबा (44 वर्ष) अहिंसक आंदोलन था।

प्रमुख कारण:

  • 84 प्रकार के कर: किसानों पर अत्यधिक लांग-बाग।
  • चंवरी कर (1903): कृष्णसिंह द्वारा कन्या के विवाह पर ₹5 का कर।
  • तलवार बंधाई (1906): पृथ्वीसिंह द्वारा लगाया गया उत्तराधिकार शुल्क।

आंदोलन के तीन चरण:

  1. प्रथम चरण (1897-1916): नेतृत्व साधु सीताराम दास ने किया।
  2. द्वितीय चरण (1916-1923): नेतृत्व विजयसिंह पथिक ने किया। 1917 में ‘ऊपरमाल पंच बोर्ड’ की स्थापना की।
  3. तृतीय चरण (1923-1941): नेतृत्व माणिक्यलाल वर्मा ने किया। 1941 में मोहन सिंह मेहता के प्रयासों से समझौता हुआ।

सांस्कृतिक प्रभाव: माणिक्यलाल वर्मा का ‘पंछीड़ा’ गीत और प्रेमचंद का उपन्यास ‘रंगभूमि’ इसी पर आधारित है।

🛡️ अन्य प्रमुख किसान आंदोलन

1. बेंगू किसान आंदोलन (1921-1924)

  • नेतृत्व: रामनारायण चौधरी।
  • शहादत: गोविंदपुरा गाँव में ट्रेंच की फायरिंग में रूपाजी और किरपाजी धाकड़ शहीद हुए।

2. नीमूचाणा हत्याकांड (14 मई 1925)

  • स्थान: अलवर (वर्तमान कोटपूतली-बहरोड़)।
  • विशेष: गांधीजी ने इसे ‘दोहरी डायरशाही’ और राजस्थान का ‘जलियांवाला बाग’ कहा।

3. शेखावाटी आंदोलन

  • कटराथल सम्मेलन (1934): किशोरी देवी के नेतृत्व में 10,000 जाट महिलाओं का विशाल सम्मेलन।
  • कूदन हत्याकांड: जिसकी चर्चा ब्रिटेन के ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में हुई।

🏹 जनजातीय (भील एवं मीणा) आंदोलन

🔥 भील आंदोलन

1. भगत आंदोलन

  • प्रणेता: गोविन्द गुरु। इन्होंने 1883 में ‘सम्प सभा’ की स्थापना की।
  • मानगढ़ हत्याकांड (17 नवंबर 1913): 1500 भील शहीद हुए। इसे भारत का दूसरा जलियांवाला बाग कहा जाता है।

2. एकी आंदोलन (1921)

  • नेतृत्व: मोतीलाल तेजावत (भीलों के मसीहा)।
  • शुरुआत: मातृकुंडिया (चित्तौड़गढ़) से।
  • नीमड़ा हत्याकांड: 1200 भील शहीद हुए। गांधीजी ने इसे जलियांवाला से भी भयानक बताया।

👤 मीणा आंदोलन

  • कारण: 1924 का ‘आपराधिक जनजाति अधिनियम’ और 1930 का ‘जरायम पेशा कानून’
  • सुधार: मुनि मगन सागर ने ‘मीन पुराण’ लिखा और जागरूकता फैलाई।
  • मुक्ति दिवस: 28 अक्टूबर 1946 को बागवास सम्मेलन में चौकीदार मीणाओं ने सामूहिक इस्तीफा दिया।
  • समाप्ति: 1952 में जरायम पेशा कानून पूरी तरह समाप्त हुआ।

📍 प्रमुख हत्याकांड एक नजर में

घटना / कांड तिथि स्थान संबंधित आंदोलन
मानगढ़ हत्याकांड17 नवंबर 1913बांसवाड़ाभगत आंदोलन
नीमड़ा हत्याकांड7 मार्च 1922विजयनगरएकी आंदोलन
डाबी हत्याकांड2 अप्रैल 1923बूंदीबरड़ किसान आंदोलन
नीमूचाणा हत्याकांड14 मई 1925अलवरअलवर किसान आंदोलन
डाबड़ा कांड13 मार्च 1947डीडवानामारवाड़ किसान आंदोलन
राजस्थान सामान्य ज्ञान – इतिहास श्रृंखला | किसान एवं जनजातीय आंदोलन नोट्स

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