राजस्थान की प्रमुख जनजातियां

राजस्थान की प्रमुख जनजातियां – सम्पूर्ण नोट्स

🏹 राजस्थान की प्रमुख जनजातियां

सांस्कृतिक, सामाजिक एवं पारंपरिक विशिष्टताओं का विस्तृत विवरण

🕺 गरासिया जनजाति

📍 निवास: सिरोही जिले की आबुरोड़ और पिण्डवाड़ा तहसीलें।
🏠 घर एवं मुखिया:
  • घर: घेर
  • गांव: फालिया
  • मुखिया: सहलोत
🤝 संस्था एवं प्रथा:
  • सहकारी संस्था: हेलरू
  • सामूहिक कृषि: हरीभावरी
  • मृत्युभोज: कांधिया

✨ अन्य मुख्य तथ्य:

  • नक्की झील: गरासिया अपनी अस्थियों का विसर्जन माउंट आबू की नक्की झील में करते हैं।
  • आदर्श पक्षी: मोर को आदर्श मानते हैं।
  • विवाह: मोर बांधिया (रीति-रिवाज), पहरावणा (बिना फेरे), और तन्ना (भगाकर)।
  • प्रमुख नृत्य: वालर, लूर, कूद, जवारा, मांदल, मोरिया।

🦌 सहरिया जनजाति (P.T.G)

📍 निवास: बारां जिले की शाहाबाद और किशनगंज तहसीलें।
⭐ विशेष: राज्य की एकमात्र जनजाति जिसे भारत सरकार ने आदिम जनजाति समूह (P.T.G) में शामिल किया है।
🏠 आवास के प्रकार:
  • साधारण घर: टापरी
  • मचाननुमा घर: टोपा / गोपना
  • बस्ती: सहराना | गांव: सहरोल
🙏 धार्मिक पक्ष:
  • कुल देवता: तेजा जी
  • कुल देवी: कोडिया देवी
  • आदि गुरु: महर्षि वाल्मीकि

🎡 प्रमुख मेले एवं नृत्य:

  • सीताबाड़ी मेला (बारां): इसे “सहरिया जनजाति का कुंभ” कहा जाता है। (वैशाख अमावस्या)
  • कपिल धारा मेला: कार्तिक पूर्णिमा को आयोजित।
  • प्रमुख नृत्य: शिकारी नृत्य।
  • मुखिया: कोतवाल | पंचायत: चौरसिया।

🛡️ कंजर जनजाति

  • क्षेत्र: हाड़ौती अंचल।
  • पाती मांगना: अपराध करने से पूर्व अपने आराध्य देव से आशीर्वाद लेना।
  • हाकम राजा का प्याला: इसे पीकर कंजर कभी झूठ नहीं बोलते।
  • आवास: इनके घरों में भागने के लिए पीछे की तरफ खिड़कियां होती हैं।
  • आराध्य: हनुमान जी और चौथ माता।
  • नृत्य: चकरी नृत्य।

🍃 कथौड़ी जनजाति

  • मूल स्थान: महाराष्ट्र (वर्तमान में उदयपुर के कोटड़ा, झाड़ोल क्षेत्र में)।
  • मुख्य कार्य: खैर के वृक्षों से कत्था तैयार करना।
  • फड़का: कथौड़ी महिलाओं द्वारा मराठी अंदाज में पहनी जाने वाली साड़ी।
  • खान-पान: महुआ की शराब और बंदर का मांस। ये दूध का प्रयोग नहीं करते।
  • नृत्य: मावलिया और होली नृत्य।

🏺 डामोर जनजाति

क्षेत्र: डूंगरपुर की सिमलवाड़ा पंचायत।

  • मुखिया: मुखी
  • विशेषता: पुरुष भी महिलाओं की तरह गहने पहनते हैं।
  • मेला: ग्यारस रेवाड़ी का मेला।

🛖 सांसी जनजाति

क्षेत्र: भरतपुर जिला।

  • वर्ग: बीजा (धनी) और माला (गरीब)।
  • विशेषता: इनमें विधवा विवाह का प्रचलन नहीं है।
  • न्याय: विवाद सुलझाने हेतु हरिजन को बुलाते हैं।

💡 महत्वपूर्ण शब्दावली एवं प्रथाएं

मौताणा: खून-खराबे पर लिया जाने वाला जुर्माना।
भराड़ी: विवाह के अवसर पर दीवारों पर बनाई जाने वाली लोकदेवी का भित्ति चित्र।
दापा: वर पक्ष द्वारा वधू के पिता को दी जाने वाली राशि।
हलमा: जनजातियों में सामूहिक सहयोग की परंपरा।
कीकमारी: विपदा के समय जोर से चिल्लाने की आवाज।
सागड़ी: बंधुआ मजदूरी प्रथा (मावडिया)।
राजस्थान सामान्य ज्ञान – कला एवं संस्कृति श्रृंखला | जनजातीय अध्ययन नोट्स

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