राजस्थान के प्रमुख सम्प्रदाय एवं संत

राजस्थान के प्रमुख सम्प्रदाय एवं संत – सम्पूर्ण नोट्स

🙏 राजस्थान के प्रमुख सम्प्रदाय एवं संत

भक्ति, दर्शन एवं आध्यात्मिक धरोहर

निर्गुण भक्ति

1. जसनाथी सम्प्रदाय

संस्थापकजसनाथ जी जाट (जन्म: 1482 ई, कतरियासर)
प्रधान पीठकतरियासर (बीकानेर)
नियम36 नियमों का पालन
प्रमुख ग्रंथसिमूदड़ा, कोडाग्रंथ
विशेषताअग्नि नृत्य एवं मतीरा फोड़ना
राजकीय सहयोगसिकंदर लोदी ने इन्हें भूमि दान दी थी।
निर्गुण भक्ति

2. विश्नोई सम्प्रदाय

संस्थापकजाम्भोजी (जन्म: 1451 ई, पीपासर)
नियम29 नियम (20+9)
मुख्य ध्येयवन्यजीव सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण
प्रधान पीठमुकाम तालवा (बीकानेर)
ग्रंथजाम्भवाणी, जम्भ सागर, जम्भ संहिता
निर्गुण भक्ति

3. दादू सम्प्रदाय (राजस्थान का कबीर)

संस्थापकदादू दयाल जी (जन्म: 1544, अहमदाबाद)
प्रधान पीठनरेना / नारायणा (जयपुर)
सत्संग स्थलअलख-दरीबा
शाखाएंखालसा, विरक्त, उत्तराधि, नागा, खाकी, स्थानधारी
शिष्य52 प्रधान शिष्य (52 स्तंभ) – गरीबदास, रज्जब जी आदि।
निर्गुण भक्ति

4. रामस्नेही सम्प्रदाय

विशेषता: गुलाबी वस्त्र धारण करना, दाढ़ी-मूंछ नहीं रखना।

शाहपुरा (भीलवाड़ा): रामचरण जी (प्रधान पीठ)
रैण (नागौर): संत दरियाव जी
सिंहथल (बीकानेर): हरिराम दास जी
खैडापा (जोधपुर): संत रामदास जी
सगुण भक्ति

5. मीरा दासी सम्प्रदाय

संस्थापकमीरा बाई (जन्म: कुड़की, पाली)
भक्ति भावश्रीकृष्ण को पति मानकर मधुर / दास भाव
ग्रंथमीरा पदावलिया, नरसी जी रो मायरो (रत्ना खाती द्वारा)
मंदिरचारभुजा नाथ (मेड़ता), मीरा मंदिर (चित्तौड़गढ़)

🔱 वैष्णव एवं शैव धर्म की शाखाएं

वल्लभ सम्प्रदाय (पुष्टि मार्ग)

प्रधान पीठ: श्रीनाथ जी, नाथद्वारा (राजसमंद)

  • कृष्ण के बाल रूप की पूजा होती है।
  • अष्टछाप कवि मंडली और पिछवाई कला का विकास हुआ।
  • दर्शन: शुद्ध अद्वैतवाद।

निम्बार्क सम्प्रदाय (हंस सम्प्रदाय)

प्रधान पीठ: सलेमाबाद (अजमेर) – रूपनगढ़ नदी के किनारे।

  • राधा-कृष्ण की युगल रूप में पूजा।
  • दर्शन: द्वैताद्वैतवाद।

📍 अन्य महत्वपूर्ण सम्प्रदाय एक नजर में

सम्प्रदाय संस्थापक प्रधान पीठ
लालदासीलालदास जीनगला जहाज (भरतपुर)
चरणदासीचरणदास जीदिल्ली (मेवात में लोकप्रिय)
निरंजनीहरिदास जी (कलियुग का वाल्मीकि)गाढ़ा (नागौर)
अलखियास्वामी लाल गिरीबीकानेर
निष्कलंकसंत माव जीसाबला (डूंगरपुर)
नवलनवल दास जीजोधपुर

👤 प्रमुख संत एवं विशिष्ट तथ्य

संत पीपा: गागरोन के राजा (प्रताप सिंह)। दर्जी समुदाय के आराध्य। गुफा – टोडारायसिंह (टोंक)।
संत धन्ना: धुंवल (टोंक)। राजस्थान में भक्ति आंदोलन का प्रारंभ करने वाले।
गवरी बाई: “बागड़ की मीरा” के नाम से प्रसिद्ध। डूंगरपुर।
संत रैदास: मीरा के गुरु। इनकी छतरी चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित है।

🏛️ संत किशनदास महाराज रामद्वारा (टांकला)

यह मंदिर अपनी उत्कृष्ट नक्काशी के लिए विश्व विख्यात है। 200 कारीगरों ने 8 साल में इसे पूर्ण किया। इसमें लोहे की एक भी कील का उपयोग नहीं किया गया है।

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