🚩 राजस्थान की प्रमुख लोक देवियाँ
कला, संस्कृति एवं शक्ति उपासना का विस्तृत विवरण
1. करणी माता (चूहों वाली देवी)
- स्थान: देशनोक (बीकानेर)
- कुलदेवी: बीकानेर के राठौड़ राजवंश की कुलदेवी।
- विशेषता: मंदिर में सफेद चूहे “काबा” कहलाते हैं, जिनका दर्शन शुभ माना जाता है।
- पुनर्निर्माण: मंदिर का वर्तमान भव्य स्वरूप महाराजा गंगा सिंह ने बनवाया।
- मेला: चैत्र व आश्विन नवरात्रों में विशाल मेला भरता है।
2. जीण माता
- स्थान: रेवासा ग्राम (सीकर)
- कुलदेवी: अजमेर के चौहानों की कुलदेवी।
- लोकगीत: इनका लोकगीत राजस्थान का सबसे लंबा लोकगीत है।
- परंपरा: देवी को अढ़ाई प्याले शराब चढ़ाने की अनूठी रस्म है।
- श्रद्धा: मीणा जनजाति और चौहानों में विशेष मान्यता।
3. कैला देवी
- स्थान: करौली (त्रिकुट पर्वत की घाटी में)
- कुलदेवी: करौली के यादव (जादौन) राजवंश की कुलदेवी।
- सांस्कृतिक पक्ष: मंदिर के सामने “लांगूरिया” गीत और नृत्य प्रमुख आकर्षण हैं।
- मेला: चैत्र शुक्ल अष्टमी (लक्खी मेला)।
4. शीतला माता (सेढ़ल माता)
- स्थान: चाकसू (जयपुर)
- उपनाम: चेचक की देवी, बच्चों की पालनहार, महामाई।
- वाहन एवं पुजारी: वाहन – गधा, पुजारी – कुम्हार समाज।
- प्रसाद: बासड़िया (बासी भोजन) का भोग लगाया जाता है।
- विशेष: विश्व की एकमात्र देवी जो खंडित रूप में पूजी जाती हैं।
5. शीला माता
- स्थान: आमेर किला (जयपुर)
- इतिहास: राजा मानसिंह प्रथम इस मूर्ति को बंगाल (पूर्वी बंगाल के केदार कायत) से जीतकर लाए थे।
- प्रसाद: यहाँ भक्तों को चरणामृत के रूप में जल या मदिरा (भक्त की इच्छा अनुसार) दी जाती है।
6. आई माता
- स्थान: बिलाड़ा (जोधपुर)
- कुलदेवी: सिरवी समाज की कुलदेवी।
- चमत्कार: इनके मंदिर (बढेर) में जल रहे अखंड दीपक की लौ से केसर टपकती है।
- वर्जन: इनके पंथ में गुर्जर जाति का प्रवेश वर्जित है।
7. ब्रह्माणी माता
- स्थान: सोरसण (बांरा)
- विशिष्टता: विश्व का एकमात्र मंदिर जहाँ देवी की पीठ की पूजा और श्रृंगार होता है।
📊 अन्य महत्वपूर्ण लोक देवियाँ एवं उनके स्थान
| क्रम | लोक देवी का नाम | मुख्य स्थान (ज़िला) | विशेष विवरण |
|---|---|---|---|
| 1 | शाकम्भरी माता | सांभर (जयपुर) / उदयपुरवाटी | चौहानों की आदि देवी |
| 2 | राणी सती | झुंझुनूं | वास्तविक नाम – नारायणी बाई (दादी जी) |
| 3 | तनोटिया माता | तन्नौट (जैसलमेर) | थार की वैष्णो देवी / सैनिकों की देवी |
| 4 | नारायणी माता | राजगढ़ (अलवर) | नाई समाज की कुलदेवी |
| 5 | सच्चिया माता | ओसियां (जोधपुर) | औसवाल समाज की कुलदेवी |
| 6 | स्वागिया माता | जैसलमेर | भाटी राजवंश की कुलदेवी |
| 7 | सुंधा माता | जालौर | यहाँ राजस्थान का प्रथम रोपवे स्थित है |
| 8 | अम्बिका माता | जगत (उदयपुर) | मेवाड़ का खजुराहो कहलाता है |
| 9 | बाण माता | चित्तौड़गढ़ / उदयपुर | मेवाड़ के सिसोदिया वंश की कुलदेवी |
| 10 | आशापुरा माता | मोदरां (जालौर) | सोनगरा चौहानों की कुलदेवी |
| 11 | घेवर माता | राजसमंद | राजसमंद झील की पाल पर मंदिर |
| 12 | त्रिपुरा सुंदरी | तलवाड़ा (बांसवाड़ा) | पाँचाल समाज की कुलदेवी |
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