मारवाड़ का राठौड़ राजवंश

मारवाड़ का राठौड़ राजवंश – नोट्स

📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं उत्पत्ति

  • नाम का अर्थ: राठौड़ शब्द ‘राष्ट्रकूट’ का अपभ्रंश माना जाता है।
  • उत्पत्ति के प्रमुख मत:
    • मुहणौत नैणसी: इन्हें कन्नौज के जयचन्द गहड़वाल का वंशज मानते हैं।
    • गौरीशंकर ओझा: बदायूं की राठौड़ शाखा से संबंधित बताया।
    • कर्नल टॉड: इन्हें ‘सूर्यवंशी’ कुल का माना है।

🛡️ संस्थापक एवं आरंभिक शासक

राव सीहा (1240-1273 ई.)

  • इन्हें मारवाड़ के राठौड़ वंश का संस्थापक (आदिपुरुष) कहा जाता है।
  • कन्नौज से आकर पाली के उत्तर-पश्चिमी भाग में अपना शासन स्थापित किया।

राव धूहड़

  • राठौड़ वंश की कुलदेवी नागणेची माता की मूर्ति कर्नाटक से लाकर नागाणा (बाड़मेर) में स्थापित की।

राव चूँडा (1394-1423 ई.)

  • इंदा परिहारों से मण्डौर को दहेज के रूप में प्राप्त किया।
  • मण्डौर को राठौड़ों की पहली स्थायी राजधानी बनाया।

🏰 विस्तार एवं गौरव का काल

राव जोधा (1438-1489 ई.)

  • जोधपुर की स्थापना: 12 मई 1459 को जोधपुर नगर बसाया।
  • मेहरानगढ़ दुर्ग: चिड़िया टूक पहाड़ी पर इस प्रसिद्ध किले का निर्माण कराया।
  • इन्हें मारवाड़ में सामंत प्रथा का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।

राव मालदेव (1532-1562 ई.)

हशमत वाला राजा (शक्तिशाली राजा)
  • इन्होंने 52 युद्धों में 58 परगने जीते थे।
  • गिरी-सुमेल का युद्ध (1544): जैतारण (पाली) में शेरशाह सूरी के साथ भीषण युद्ध।
  • सेनानायक: जैता और कूँपा ने अदम्य साहस का परिचय दिया।
“मैं मुट्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्तान की बादशाहत खो देता।” – शेरशाह सूरी (मालदेव की वीरता को देखकर)

राव चंद्रसेन (1562-1581 ई.)

मारवाड़ का प्रताप
  • इन्हें “मारवाड़ का भूला-बिसरा नायक” (The Forgotten Hero) कहा जाता है।
  • अकबर के नागौर दरबार (1570) में गए, लेकिन अधीनता स्वीकार किए बिना वापस लौट आए।
  • इन्होंने छापामार युद्ध पद्धति अपनाकर मुगलों का विरोध किया।

🤝 मुग़ल काल एवं प्रमुख शासक

मोटा राजा उदयसिंह

  • मारवाड़ के प्रथम शासक जिन्होंने मुगलों की अधीनता स्वीकार की और वैवाहिक संबंध स्थापित किए।

महाराजा जसवंतसिंह प्रथम (1638-1678 ई.)

  • मुगल उत्तराधिकार युद्ध (धरमत का युद्ध) में औरंगजेब का कड़ा विरोध किया।
  • इनकी मृत्यु पर औरंगजेब ने कहा – “आज कुफ्र (धर्म विरोध) का दरवाजा टूट गया है।”

राव अमरसिंह राठौड़ (नागौर)

  • अपनी वीरता और स्वाभिमान के लिए प्रसिद्ध। ‘मतीरे की राड़’ (1644) नामक ऐतिहासिक घटना इन्हीं के समय हुई।

💡 विशेष परीक्षा उपयोगी तथ्य

  • राठौड़ वंश की कुलदेवी: नागणेची माता
  • राठौड़ वंश की आराध्य देवी: चामुण्डा माता
  • जोधपुर के शासकों का राजतिलक: श्रृंगार चौकी (मेहरानगढ़) में होता था।

© राजस्थान इतिहास श्रृंखला – मारवाड़ रियासत

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष नोट्स

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