गुर्जर प्रतिहार राजवंश

गुर्जर प्रतिहार वंश – सम्पूर्ण नोट्स

📍 स्थापना और उत्पत्ति

  • लक्ष्मण के वंशज: यह वंश अपनी उत्पत्ति भगवान राम के अनुज लक्ष्मण से मानता है, जो राम के ‘प्रतिहार’ (द्वारपाल) थे।
  • क्षेत्र: इस वंश की स्थापना दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के गुर्जरात्रा प्रदेश में हुई।
  • ऐतिहासिक प्रमाण: पहली बार गुर्जर जाति का उल्लेख चालुक्य नरेश पुलकेशियन द्वितीय के एहोल अभिलेख में मिलता है।
  • विदेशी विवरण: चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भीनमाल को ‘कू-चे-लो’ और राजधानी को ‘पीलोमोलो’ कहा है।
💡 ऐतिहासिक तथ्य: आर.सी. मजूमदार के अनुसार, इन्होंने 6वीं से 12वीं सदी तक अरबों के खिलाफ भारत के ‘द्वारपाल’ के रूप में कार्य किया।

🏰 मण्डौर के प्रतिहार

यह प्रतिहारों की 26 शाखाओं में सबसे प्राचीन मानी जाती है।

  • आदि पुरुष: हरिशचंद्र (ब्राह्मण), जिनकी पत्नी भद्रा के पुत्रों ने मण्डौर जीता।
  • रज्जिल: वंशावली वास्तविक रूप से रज्जिल से शुरू होती है।
  • नरभट्ट: इन्हें ह्वेनसांग ने ‘पेल्लोपेल्ली’ (शक्तिशाली) की उपाधि दी।
  • कक्कुक: 861 ई. के घटियाला शिलालेख के अनुसार इनके काल में सती प्रथा का उल्लेख मिलता है।

⚔️ वत्सराज (783-795 ई.)

प्रतिहार वंश का वास्तविक संस्थापक

  • इन्हें ‘रणहस्तिन्’ (युद्ध का हाथी) की उपाधि दी गई थी।
  • त्रिकोणात्मक संघर्ष: वत्सराज ने ही कन्नौज के लिए पाल, राष्ट्रकूट और प्रतिहारों के बीच महासंग्राम शुरू किया।
  • स्थापत्य: जोधपुर के औसियां में सूर्य और जैन मंदिरों का निर्माण। इसे ‘राजस्थान का भुवनेश्वर’ भी कहते हैं।
  • साहित्यिक प्रगति: इनके काल में उद्योतन सूरी ने “कुवलयमाला” और जिनसेन ने “हरिवंश पुराण” लिखा।

🏹 मिहिरभोज प्रथम (836-885 ई.)

यह प्रतिहार साम्राज्य का स्वर्णकाल था।

  • उपाधियाँ: ग्वालियर अभिलेख में ‘आदिवराह’ और दौलतपुर अभिलेख में ‘प्रभास’
  • ये भगवान विष्णु (वैष्णव धर्म) के परम भक्त थे।
  • विदेशी प्रशंसा: अरब यात्री सुलेमान ने इन्हें भारत का सबसे शक्तिशाली शासक और ‘इस्लाम का सबसे बड़ा शत्रु’ बताया।
  • इन्होंने चांदी के ‘द्रम’ सिक्के चलाए जिन पर ‘श्रीमदादिवराह’ अंकित था।

🎓 महेन्द्रपाल एवं महिपाल

1. महेन्द्रपाल प्रथम (885-910 ई.)

  • महान कवि राजशेखर इनके गुरु और दरबारी विद्वान थे।
  • राजशेखर की कृतियाँ: कर्पूरमंजरी, काव्यमीमांसा, बालरामायण, बालभारत, विधाशालभंजिका।
  • इन्हें ‘रघुकुल चूड़ामणि’ और ‘निर्भय नरेश’ भी कहा जाता है।

2. महिपाल प्रथम (914-943 ई.)

  • अरब यात्री अलमसूदी इनके काल में भारत आया। उसने राजा को ‘बौरा’ कहा।
  • राजशेखर ने महिपाल को ‘आर्यावर्त का महाराजाधिराज’ कहकर संबोधित किया।

📉 राजवंश का पतन

  • राज्यपाल: इसके समय 1018 ई. में महमूद गजनवी ने कन्नौज पर आक्रमण किया।
  • अंतिम शासक: इस वंश का अंतिम राजा यशपाल (1036 ई.) था।
  • अंत: अंततः चन्द्रदेव गहड़वाल ने कन्नौज पर अधिकार कर गुर्जर-प्रतिहार सत्ता को सदा के लिए समाप्त कर दिया।

© राजस्थान सामान्य ज्ञान – डिजिटल नोट्स सीरीज

विषय: मध्यकालीन भारतीय इतिहास (गुर्जर-प्रतिहार)

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