🚩 चौहान राजवंश का इतिहास
सांभर, अजमेर, रणथंभौर एवं जालौर की वीर गाथा
🛡️ उत्पत्ति एवं मूल स्थान
- अग्निकुण्ड सिद्धांत: चंद्रबरदाई (पृथ्वीराज रासो) के अनुसार चौहानों की उत्पत्ति आबू पर्वत पर ऋषि वशिष्ठ के यज्ञ कुण्ड से हुई।
- ब्राह्मण वंश: बिजोलिया शिलालेख के अनुसार चौहान ‘वत्सगौत्रीय ब्राह्मण’ थे।
- सूर्यवंशी: डॉ. गौरीशंकर ओझा इन्हें सूर्यवंशी मानते हैं।
- मूल स्थान: सपादलक्ष (सांभर) और प्रारंभिक राजधानी अहिच्छत्रपुर (नागौर) थी।
- आदि पुरुष: वासुदेव चौहान (551 ई.), जिन्होंने सांभर झील का निर्माण कराया।
🏙️ अजमेर के प्रमुख शासक
1. अजयराज (1113-1133 ई.)
- 1113 ई. में अजयमेरु (अजमेर) नगर बसाया और उसे राजधानी बनाया।
- बीठली पहाड़ी पर तारागढ़ दुर्ग (गढ़बीठली) का निर्माण कराया।
- ‘श्री अजयदेव’ नाम के चांदी के सिक्के चलाए।
2. अर्णोराज (1133-1155 ई.)
- तुर्कों को पराजित कर अजमेर को शुद्ध करने हेतु आनासागर झील का निर्माण कराया।
- पुष्कर में प्रसिद्ध वराह मंदिर बनवाया।
- पुत्र जग्गदेव ने इनकी हत्या की (चौहानों का पितृहंता)।
3. विग्रहराज चतुर्थ / बीसलदेव (1158-1163 ई.)
- इनका काल सपादलक्ष का स्वर्णयुग कहलाता है।
- उपाधि: कवि बांधव (साहित्य प्रेम के कारण)।
- हरिकेली नाटक की रचना की। अजमेर में संस्कृत पाठशाला बनवाई (जिसे बाद में अढ़ाई दिन का झोंपड़ा बनाया गया)।
- टोंक में बीसलपुर बांध और नगर बसाया।
4. पृथ्वीराज चौहान तृतीय (1177-1192 ई.)
उपनाम: राय पिथौरा (युद्ध में पीठ न दिखाने वाला), दल पुंगल (विश्व विजेता)।
- पिता सोमेश्वर और माता कर्पूरीदेवी। 11 वर्ष की आयु में शासक बने।
- तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.): मुहम्मद गौरी को बुरी तरह पराजित किया।
- तराइन का द्वितीय युद्ध (1192 ई.): गौरी की कूटनीति के कारण पृथ्वीराज की हार हुई, जिससे भारत में मुस्लिम सत्ता की नींव पड़ी।
- दरबारी विद्वान: चंदबरदाई (पृथ्वीराज रासो), जयानक (पृथ्वीराज विजय)।
🐯 रणथंभौर के चौहान
हम्मीर देव चौहान (1282-1301 ई.)
- “सिंह सवन सत्पुरुष वचन, कदली फलत इक बार। तिरिया तेल हम्मीर हठ, चढ़े न दूजी बार॥”
- अलाउद्दीन खिलजी के विद्रोही मुहम्मद शाह को शरण देने के कारण युद्ध हुआ।
- राजस्थान का प्रथम साका (1301 ई.): हम्मीर देव वीरगति को प्राप्त हुए और रानी रंगदेवी ने जौहर किया।
🏰 जालौर के सोनगरा चौहान
कान्हड़देव चौहान (1305-1311 ई.)
- जालौर का प्राचीन नाम जाबालीपुर और किले का नाम सुवर्णगिरी था।
- 1311 ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने जालौर जीता और इसका नाम जलालाबाद रखा।
- विवरण: पद्मनाभ रचित ‘कान्हड़दे प्रबन्ध’ में मिलता है।
🔥 हाड़ौती के चौहान (बूँदी, कोटा, झालावाड़)
| रियासत | संस्थापक / मुख्य तथ्य | विशेष जानकारी |
|---|---|---|
| बूँदी | देवा हाड़ा (1241 ई.) | बूँदा मीणा को हराकर स्थापना की। 1734 में मराठों का प्रथम प्रवेश यहीं हुआ। |
| कोटा | माधोसिंह हाड़ा (1631 ई.) | शाहजहाँ ने बूँदी से अलग कर स्वतंत्र बनाया। मुकुन्द सिंह ने ‘अबली-मीणी महल’ बनवाया। |
| झालावाड़ | मदनसिंह झाला (1838 ई.) | अंग्रेजों द्वारा स्थापित राजस्थान की सबसे नवीनतम रियासत। |
📍 झाला जालिमसिंह (कोटा के प्रधानमंत्री)
- इन्हें “हाड़ौती का वीर दुर्गादास” कहा जाता है।
- इन्होंने मराठों, पिंडारियों और अंग्रेजों के बीच संतुलन बनाकर कोटा को सुरक्षित रखा।
⛰️ सिरोही के देवड़ा चौहान
- संस्थापक: लुम्बा देवड़ा (1311 ई.)।
- 1425 ई. में सहासमल ने सिरोही नगर बसाया।
- दत्ताणी का युद्ध (1583): सिरोही के सुरताण ने अकबर की शाही सेना को पराजित किया।
- 1823 ई. में सिरोही ने ईस्ट इंडिया कंपनी से संधि की (राजस्थान की अंतिम रियासत)।
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